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विपक्ष के विरोध के बीच MSME को पेमेंट में होने वाली देरी से निपटने वाला बिल राज्यसभा से हुआ पास

राज्यसभा ने एक बिल पास किया, जिसका मकसद MSME को पेमेंट में देरी की समस्या को हल करना है। नया बिल अब तय समय-सीमा के अंदर विवादों के तेज़ी से निपटारे, सेटलमेंट एग्रीमेंट के तहत रिकवरी और लिक्विडिटी (नकदी) की समस्याओं को दूर करने में मदद करेगा। विपक्ष के सदस्यों के सदन में हंगामा करने के बावजूद यह बिल पास हो गया।

‘माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज डेवलपमेंट (संशोधन) बिल, 2026’ के पास होने के तुरंत बाद ऊपरी सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। इस बिल का मकसद अदालतों को यह अधिकार देना है कि अगर किसी आदेश को रद्द करने की अर्ज़ी छह महीने से ज़्यादा समय से लंबित है, तो वे MSME सप्लायर्स को तय रकम का कम से कम 50% पेमेंट करने का आदेश दे सकें।

बिल पर चर्चा के दौरान और बाद में वॉइस वोट से इसके पास होने तक विपक्ष के सदस्य नारे लगाते रहे। वे NEET परीक्षा का पेपर लीक होने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवालों के जवाब के लिए गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग कर रहे थे और “हमें न्याय चाहिए” जैसे नारे लगा रहे थे।

बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए, केंद्रीय MSME मंत्री जीतन राम मांझी ने इस सेक्टर और समाज के विभिन्न वर्गों के लिए प्रस्तावित कानून के फायदों के बारे में बताया और विपक्ष के सदस्यों के ज़ोरदार विरोध पर निराशा जताई।

मंत्री ने कहा, “हमें उम्मीद थी कि हमारे विपक्षी सहयोगी इस बिल का समर्थन और सहयोग करेंगे और इसे पास कराएंगे, लेकिन आज वे इसका विरोध कर रहे हैं… मुझे हैरानी है, लेकिन इसके बावजूद मैं सदन के सामने प्रस्ताव रखता हूं कि 2006 के एक्ट में संशोधन करके इस बिल को पास किया जाए।”

उन्होंने कहा कि इस बिल का मकसद प्रशासनिक ढांचे में सुधार और पेमेंट सिस्टम को आसान बनाकर MSME सेक्टर के सामने आ रही मौजूदा चुनौतियों का समाधान करना है।

मांझी ने कहा, “इसका मकसद संवैधानिक सिद्धांतों और व्यवसायों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी संबंधित पक्षों के हितों में संतुलन बनाना है।” उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार MSME सेक्टर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने MSME सेक्टर को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया, जो देश के मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट में अहम योगदान देता है।

उन्होंने बताया कि MSME भारत की GDP में 31%, देश के मैन्युफैक्चरिंग में 36% और एक्सपोर्ट में 41% का योगदान देते हैं। मंत्री ने सदन को बताया, “MSME को दिया गया बकाया लोन, जो 2014-15 में 10 लाख करोड़ रुपये था, आज बढ़कर 38.35 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गया है। इससे पता चलता है कि MSME को लोन मिलने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है।”

मांझी ने कहा कि MSME मंत्रालय ‘चैंपियन MSME’ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

बिल पास होने के बाद, सदन के नेता जे पी नड्डा ने दावा किया कि विपक्ष के सदस्यों ने अपनी ही पार्टी द्वारा लाए गए संशोधनों का भी समर्थन नहीं किया।

राज्यसभा में विपक्ष ने जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर लगातार नारेबाज़ी और विरोध किया, जबकि सदस्य MSME सेक्टर को मज़बूत करने वाले बिल पर बहस कर रहे थे।

बहस शुरू होने से पहले ही दिक्कतें शुरू हो गईं, जब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने की इजाज़त नहीं दी गई, जिससे पूरे विपक्ष ने चेयर से उन्हें बोलने देने की मांग की। खड़गे ने पूछा कि अगर उन्हें पाँच मिनट बोलने दिया जाता तो क्या आसमान टूट पड़ता?

सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि MSME मंत्री पहले ही बिल पेश कर चुके थे और बिल पर चर्चा शुरू हो गई थी।

कांग्रेस सांसद अजय माकन ने विरोध करते हुए कहा कि यह “दुर्भाग्यपूर्ण” है कि विपक्ष के नेता (LoP) को बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “ऐसा कभी नहीं हुआ कि जब विपक्ष के नेता बोलना चाहें, तो उन्हें मना कर दिया जाए… भारत के नागरिक देख रहे हैं।” IndiaNews Portal

नड्डा ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि माकन ने बिल पर एक भी वाक्य नहीं बोला है और चेयर से आग्रह किया कि उनकी बातों को रिकॉर्ड से हटा दिया जाए।

बिल की ओर मुड़ते हुए, उन्होंने बड़ी कंपनियों और MSME के ​​बीच भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “बड़ी कंपनियों के लिए ‘हेयरकट’ (कर्ज़ में कटौती) की इजाज़त है, लेकिन MSME के ​​लिए नहीं,” और फिर से विरोध का मुद्दा उठाने की कोशिश की।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ा विरोध जताया और आरोप लगाया कि माकन बोलने के कई मौके मिलने के बावजूद “सदन की गरिमा को कम करने की कोशिश” कर रहे थे।

बहस के दौरान हंगामा जारी रहा; विपक्ष के सदस्य जब भी बिल पर बोलने के लिए बुलाए जाते, तो वे बार-बार जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठाने की कोशिश करते। इससे उप-सभापति हरिवंश को दखल देना पड़ा और उनसे विषय तक ही सीमित रहने का आग्रह करना पड़ा – एक ऐसी अपील जिस पर ज़्यादातर सदस्यों ने ध्यान नहीं दिया। सुमित्रा बाल्मीक (BJP) ने कहा कि कांग्रेस के शासन में गरीबों को दबाया गया था और मोदी सरकार उन्हें मुख्यधारा में ला रही है। उन्होंने नारे लगाने वाले सदस्यों पर निशाना साधते हुए एक शेर पढ़ा: “आंधियां बुझाती हैं चिराग, मोदी ने तूफ़ान में चिराग जलाए हैं।”

डोला सेन (TMC) ने इस बात पर बोलना शुरू किया कि MSME सेक्टर बेरोजगारी की समस्या को कैसे हल कर सकता है, लेकिन फिर उन्होंने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गृह मंत्री से जवाब की मांग करते हुए कहा कि “कोई भी सुरक्षित नहीं है।” चेयर ने उन्हें बीच में ही रोक दिया।

इसके बाद संतुप्त मिश्रा (BJD) को बोलने के लिए कहा गया। उन्होंने MSME के ​​लिए बेहतर कैश फ़्लो सपोर्ट, फ़ॉर्मलाइज़ेशन के दौरान केंद्रीय एजेंसी की मदद और कोऑर्डिनेटेड GST और ट्रेड-डिस्काउंटिंग प्लेटफ़ॉर्म की मांग की।

बिल का समर्थन करते हुए मस्तान राव यादव बीधा (TDP) और नवीन चंद्र वद्दिराजू (BRS) ने कहा कि इससे यह सेक्टर और मज़बूत होगा।

गोल्ला बाबूराव (YSRCP) ने MSME के ​​लिए PLI स्कीम की मांग की, जबकि एम. थम्बिदुरई (AIADMK) ने राज्यों के लिए वित्तीय और इंफ़्रास्ट्रक्चर सपोर्ट की अपील की।

राजेंद्र हीरालाल जैन (NCP) ने कहा कि विपक्ष बिल का समर्थन करेगा “अगर वे इसे ध्यान से सुनें।”

संजय सेठ (BJP) ने कांग्रेस पर MSME सेक्टर की अनदेखी करने और युवाओं को “गुमराह” करने का आरोप लगाया।

प्रमोद बोरो (UPPL) ने बिल का समर्थन किया और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान क्रेडिट-लिंक्ड राहत की मांग की, जबकि रामजी लाल सुमन (BSP) ने उपजाऊ ज़मीन पर फ़ैक्टरियाँ लगाने पर रोक लगाने और MSME को पेट्रोल ब्लेंडिंग के लिए इथेनॉल बनाने की अनुमति देने का सुझाव दिया।

संतोष कुमार पी (CPI), नीरज डांगी (कांग्रेस), प्रवीण चक्रवर्ती (कांग्रेस) और वी. शिवदासन (CPM) ने भी छात्रों का मुद्दा उठाने की कोशिश की, जबकि चौधरी मोहम्मद रमज़ान (JKNC) ने टिप्पणी की कि “सदन व्यवस्थित नहीं है।”

सुलता देव (BJD) ने ओडिशा में MSME को लेकर चिंता जताई और कहा कि लाभार्थियों तक सीड मनी नहीं पहुँच रही है।

प्रस्तावित कानून का मकसद मध्यस्थता समझौते या आर्बिट्रेशन अवॉर्ड की वसूली को ज़मीन के लगान की बकाया राशि के तौर पर करना है।

बिल में कुछ प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़े अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने का भी प्रस्ताव है, जिसमें सज़ा-आधारित जुर्माने की जगह अलग-अलग स्तर के जुर्माने और पहली बार गलती पर चेतावनी देने का प्रावधान है।

इसमें माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज़ेज़ के मुफ़्त और स्वैच्छिक रजिस्ट्रेशन के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को नोटिफ़ाई करने का प्रावधान है।

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