Home उत्तर प्रदेश ज़ख़्म पहले दिया ज़ख़ामत नें और फिर रंज दिया राहत ने –...

ज़ख़्म पहले दिया ज़ख़ामत नें और फिर रंज दिया राहत ने – डॉ अफ़रोज़ तालिब

836
0
blank

ज़ख़्म पहले दिया ज़ख़ामत नें और फिर रंज दिया राहत ने – डॉ अफ़रोज़ तालिब

बलरामपुर :- अदबी संगम तुलसीपुर के बैनर तले मॉर्डन पब्लिक स्कूल में श्रद्धांजलि गोष्ठी (ताज़ीती नशिस्त) का आयोजन किया गया। जिसमें साहित्यकार, पत्रकार और अधिवक्ता स्वर्गीय ज़ख़ामत अली उर्फ़ लड्डू भाई के अलावा दिवंगत शायर डॉ राहत इंदौरी, तथा कवि राधेश्याम वर्मा को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर ओमप्रकाश मिश्र नें की तथा संचालन डॉक्टर अफरोज़ तालिब ने किया और मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली से आए वेलफेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव एवं शायर सिराज तालिब उपस्थित रहे। गोष्ठी के संयोजक रेहान उत्साही ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया। काव्य पाठ से पूर्व शायरों और अतिथियों नें जनपद के वरिष्ठ पत्रकार और हर दिल अज़ीज़ शख्सियत स्वर्गीय ज़ख़ामत अली उर्फ़ लड्डू भाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डाला और कहा कि एक ज़िंदा दिल हँसमुख और धार्मिक सौहार्द के प्रतीक का इस तरह छोड़ कर जाना बहुत दुःखद है लड्डू भाई एक ऎसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपनें प्यार और व्यवहार से हर शख़्स के दिल में जगह बनाई हम उन्हें कभी भूल नहीं पाएंगे।

इस अवसर पर शायरों और कवियों के द्वारा पढ़े गए कुछ अशार और पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं।

ज़ख़्म पहले दिया ज़ख़ामत नें,
और फिर रंज दिया राहत ने।।
ये किसी को भी छोड़ती ही नहीं।
मौत क्या शै बनाई क़ुदरत ने।।
डॉ अफ़रोज़ तालिब

जहां खूंखार लगता है ज़मीं श्मशान लगती है।
तेरे जाने से ये दुनिया बड़ी वीरान लगती है।।
सिराज तालिब

उर्दू अदब की जान ज़ख़ामत नहीं रहे।
बलरामपुर की शान ज़ख़ामत नहीं रहे।।
शाहरुख साहिल

जिसके तन का लिबास छोटा हो।
उस भिखारन से इश्क़ मत करना।।
रेहान अशरफ़ उत्साही

मेरे चेहरे की लकीरों को ज़रा ग़ौर से पढ़।
इसमें लिक्खी है मुकम्मल सी कहानी तेरी।।
एहतेमाम सादिक़

इनके अलावा डॉ ओम प्रकाश मिश्रा, विनोद सिंह कलहंस, कन्हैया लाल मधुर, तनवीर साकिब, डॉ अशोक सिंह चौहान, आदि ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

patrika-newz-mobile-app

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here